दावोस में ट्रंप का यूरोप पर हमला, ग्रीनलैंड को बताया अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम,

दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम (WEF) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड और नाटो को लेकर यूरोपीय देशों पर तीखा हमला बोला। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नाटो को सौ प्रतिशत समर्थन और संसाधन देता है, लेकिन बदले में उसे कुछ हासिल नहीं होता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर यूरोप पर किसी तरह का खतरा आता है, तो अमेरिका ही उसकी रक्षा के लिए आगे आएगा।ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने इसे “बर्फ का एक विशाल टुकड़ा” बताते हुए कहा कि यह अमेरिका को चीन और रूस जैसे देशों से संभावित खतरों से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि यूरोप अमेरिका की बातों को नजरअंदाज करता है, तो अमेरिका इसे याद रखेगा।ट्रंप ने द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय डेनमार्क जर्मनी, इटली और जापान के सामने हार गया था और यूरोप का कोई भी देश ग्रीनलैंड को बचाने आगे नहीं आया। उस दौर में अमेरिका ने मोर्चा संभालते हुए ग्रीनलैंड में जीत हासिल की, लेकिन बाद में इसे डेनमार्क को सौंप देना अमेरिका की “मूर्खता” थी। उनके अनुसार, अमेरिका को ग्रीनलैंड अपने पास ही रखना चाहिए था।

हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ग्रीनलैंड को लेकर बल प्रयोग नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि उन्हें सेना के इस्तेमाल की कोई जरूरत नहीं है और वे केवल बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं। ट्रंप ने ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि अमेरिका सिर्फ “ग्रीनलैंड नाम की एक जगह” चाहता है, क्योंकि वही इस विशाल द्वीप की सुरक्षा, विकास और सुधार कर सकता है।उन्होंने यह भी दावा किया कि लगभग दो सदियों से अमेरिकी राष्ट्रपति ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश करते रहे हैं और डेनमार्क इस द्वीप पर पर्याप्त निवेश नहीं कर रहा है। इसी कारण ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर तत्काल बातचीत की मांग की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *