पिछले हफ्ते दिल्ली से श्रीनगर जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट को उड़ान के दौरान भीषण तूफान और टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। उड़ान के दौरान ओलों की बौछार से विमान के आगे के हिस्से को नुकसान पहुँचा। फ्लाइट सुरक्षित रूप से श्रीनगर एयरपोर्ट पर लैंड कर गई, और राहत की बात यह है कि सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित हैं तथा किसी को कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ।घटना के बाद कई यात्रियों ने बताया कि उन्होंने पहले कभी इतना जबरदस्त टर्बुलेंस अनुभव नहीं किया था। यह घटना दर्शाती है कि प्री-मॉनसून के मौसम में विमानों को अत्यधिक और अप्रत्याशित मौसमीय गतिविधियों का सामना करना पड़ता है, जिससे उड़ानों की सुरक्षा और संचालन चुनौतीपूर्ण हो जाता है।यह पहली बार नहीं है जब मई के महीने में इस तरह की घटना हुई है। तीन वर्ष पहले मुंबई से दरभंगा जा रही एक स्पाइसजेट फ्लाइट भी टर्बुलेंस में फंसी थी, जिसमें 18 यात्री घायल हुए थे और दुर्भाग्यवश एक यात्री की एक माह बाद मृत्यु हो गई थी।TOI द्वारा प्राप्त जांच रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल से जून के मध्य तक का समय विमानन के लिहाज़ से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। इस अवधि में मौसम का व्यवहार अनिश्चित और खतरनाक हो सकता है, जिससे पायलटों को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है।

विमानन कंपनियों, DGCA और मौसम विभाग के लिए सुझाव:
- टर्बुलेंस से बचाव के लिए फ्लाइट रूट और ऊंचाई में बदलाव जैसे उपाय अपनाए जाएं।
- मौसम पूर्वानुमान को और अधिक सटीक बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग हो।
- यात्रियों को उड़ान से पहले संभावित मौसम स्थितियों की जानकारी दी जाए।
- पायलटों और क्रू मेंबर्स के लिए टर्बुलेंस-सेफ्टी ट्रेनिंग को और अधिक मजबूत किया जाए।