अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में घोषित गाज़ा शांति योजना का समर्थन कर पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार गहरे राजनीतिक और कूटनीतिक संकट में फंस गई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने वाशिंगटन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात कर इस योजना के समर्थन का ऐलान किया था। लेकिन पाकिस्तान में विपक्षी दलों और खासकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई (PTI) ने इसे देश की विदेश नीति और फिलिस्तीन समर्थक रुख से विचलन बताते हुए कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।विवाद बढ़ने पर मंगलवार को विदेश मंत्री इशाक डार ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान बिना शर्त इस योजना को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने पहले से चर्चा की गई मूल रूपरेखा में बदलाव किया है। डार ने स्पष्ट किया कि यदि आठ मुस्लिम देशों की ओर से संयुक्त रूप से दिए गए सुझाव और प्रस्तावों को शामिल नहीं किया गया, तो यह शांति योजना पाकिस्तान के लिए मान्य नहीं होगी।उन्होंने कहा, “पाकिस्तान गाज़ा में स्थायी शांति चाहता है। लेकिन अगर हमारी और मुस्लिम देशों की शर्तों को नजरअंदाज किया गया, तो हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते।”पाकिस्तान में इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। इमरान खान की पार्टी पीटीआई और कई धार्मिक दलों ने आरोप लगाया है कि शहबाज शरीफ सरकार ने फिलिस्तीन के ऐतिहासिक समर्थन से समझौता किया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान को किसी भी ऐसी अमेरिकी पहल का हिस्सा नहीं बनना चाहिए, जिसमें फिलिस्तीनी नेतृत्व की भागीदारी और सहमति न हो।कई विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार ने ट्रंप के गाज़ा प्लान का समर्थन इतनी जल्दी क्यों किया, जबकि इसके सभी पहलुओं पर मुस्लिम देशों के बीच अभी सहमति भी नहीं बनी है।जनता के बीच भी इस मुद्दे पर असमंजस की स्थिति है। एक ओर पाकिस्तान हमेशा से फिलिस्तीन के समर्थन में खड़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका से कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों की मजबूरी भी सरकार को प्रभावित कर रही है। यही कारण है कि सरकार का रुख अस्पष्ट और उलझा हुआ दिखाई दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय शांति सेना पर संकेत
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अगर गाज़ा में युद्धविराम लागू कराने और स्थायी शांति बनाए रखने के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय शांति रक्षक सेना (International Stabilization Force) गठित की जाती है, तो पाकिस्तान उस मुस्लिम देशों की बहुराष्ट्रीय फोर्स का हिस्सा बनने पर विचार कर सकता है। उन्होंने जोड़ा कि इस पर अंतिम निर्णय पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व करेगा।यह बयान उस समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गाज़ा संघर्ष को खत्म करने के लिए व्यापक दबाव बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और आठ मुस्लिम देशों के नेताओं के बीच हुई एक तैयारी बैठक में इस शांति योजना पर चर्चा हुई थी।
विपक्ष और जनता की प्रतिक्रिया

गाज़ा संघर्ष की पृष्ठभूमि
गाज़ा पट्टी लंबे समय से इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष का केंद्र रही है। हालिया संघर्ष में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब किसी ठोस शांति योजना की तलाश में है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्तावित योजना इसी प्रयास का हिस्सा है, जिसमें युद्धविराम, मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं।
पाकिस्तान की दुविधा
पाकिस्तान की दुविधा यह है कि वह एक ओर फिलिस्तीन का पुराना और मुखर समर्थक है, वहीं दूसरी ओर उसे अमेरिका से आर्थिक सहयोग और कूटनीतिक समर्थन की सख्त जरूरत है। यही कारण है कि सरकार ने शुरुआत में समर्थन जताया, लेकिन घरेलू दबाव और मुस्लिम देशों के असहमति जताने पर अब नरम पड़ने लगी है।विदेश मंत्री डार का बयान इसी बदलते रुख की झलक देता है। उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान मुस्लिम देशों की एकजुटता के बिना किसी भी शांति योजना को स्वीकार नहीं करेगा