जय श्री दद्दाजी: भोपाल में भक्ति के महाकुंभ का शंखनाद, सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ का भव्य आयोजन,

राजधानी भोपाल में आस्था, साधना और लोककल्याण का अद्भुत संगम साकार होने जा रहा है। जय श्री दद्दाजी के उद्घोष के साथ भक्ति के महाकुंभ का शंखनाद हो चुका है। भोपाल के बिट्टन मार्केट स्थित दशहरा मैदान में 12 से 18 मार्च 2026 तक “सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ” का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाला यह विराट अनुष्ठान राजधानी को पूर्ण रूप से शिवमय कर देगा।लोककल्याण और शिव-शक्ति की आराधना के संकल्प से प्रेरित इस महायज्ञ में मंत्रोच्चार और शास्त्रीय विधि-विधान के साथ सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा। निर्मित शिवलिंगों का विधिवत महादेव का अभिषेक किया जाएगा, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठेगा। आयोजन स्थल दशहरा मैदान को विशेष रूप से शिव आराधना की तपोभूमि के रूप में सजाया जाएगा।इस दिव्य आयोजन की स्वीकृति तपोभूमि घनश्याम बाग आश्रम से प्राप्त हुई है। भोपाल शिष्य मंडल के प्रतिनिधिमंडल—आर.सी. गुप्ता, गजानन शर्मा, अवधेश राठौर, यशवंत सिंह दरबार सहित अन्य—पूज्य बड़े भैया डॉ. अनिल प्रभाकर शास्त्री जी के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आयोजन की अनुमति हेतु निवेदन करने पहुंचे। शिष्यों की निष्ठा, समर्पण और आयोजन के पवित्र उद्देश्य को देखते हुए पूज्य बड़े भैया ने सहर्ष अनुमति प्रदान की।इस महायज्ञ को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए आयोजन समिति में सभी गुरुभाई सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। प्रमुख रूप से आर.सी. गुप्ता, गजानन शर्मा, अवधेश राठौर, यशवंत सिंह दरबार, रविंद्र तिवारी, अनुराधा शर्मा, धीरेंद्र शर्मा, अशोक गुप्ता, राजेंद्र शर्मा, डॉ. बी.एल. जाट, मंजुला चौधरी, वीरेंद्र चौधरी, चंद्रशेखर शर्मा, विशाल आचार्य, राजीव द्विवेदी, नंदलाल राजपूत, गणेश शर्मा, ग्वालियर के संतोष मारन सहित अनेक श्रद्धालु और साधक आयोजन की तैयारी में जुटे हैं।

आध्यात्मिक महापर्व का संकल्प

आयोजन समिति के अनुसार, “मिट्टी से बने प्रत्येक पार्थिव शिवलिंग में साक्षात महादेव का वास होता है। जब करोड़ों श्रद्धालु अपने हाथों से शिवलिंग निर्माण करेंगे, तब भोपाल की धरा स्वयं कैलाश पर्वत के समान दैदीप्यमान हो उठेगी।” इस अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा का भी आयोजन किया जाएगा, जो भक्तों को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश देगा।यह भव्य आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक साधना, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का पर्व होगा। राजा भोज की नगरी भोपाल सात दिनों तक शिवमय वातावरण में डूबी रहेगी। यह भक्ति का महाकुंभ न केवल भोपाल, बल्कि सम्पूर्ण अंचल के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभूति बनने जा रहा है।

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