जनजातीय कोल समाज प्राचीन काल से ही अपनी वीरता एवं गंभीरता के लिए जाना जाता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव,

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय समाज का समृद्ध एवं गौरवशाली इतिहास रहा है। जनजातीय समाज ने देश की स्वतंत्रता, संस्कृति और विकास में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि कोल समाज प्राचीन काल से वीरता, संकल्प और सामाजिक चेतना के लिए जाना जाता है। अनेक जनजातीय नायकों ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा करते हुए अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बलिदान देकर इतिहास रचा है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को शहडोल जिले के ब्यौहारी में आयोजित राज्य स्तरीय कोल जनजातीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 330 करोड़ रुपये लागत के 55 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 52 कार्यों का भूमिपूजन किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं:

  • भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज, शहडोल में स्थापित की जाएगी।
  • महाकवि बाणभट्ट की प्रतिमा बाणसागर जलाशय पर स्थापित की जाएगी।
  • प्रदेश के ऐसे कोल जनजातीय परिवार, जिनके भूमि पट्टे नहीं बने हैं, उनकी जांच कराकर उन्हें पट्टा प्रदान किया जाएगा
  • जनजातीय समाज के बेटा-बेटियों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी
  • प्रदेश के सभी संभागों में 24-24 करोड़ रुपए की लागत से 100-100 सीटर बालक एवं बालिका छात्रावास और परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि जनजातीय समाज सशक्त, शिक्षित और आत्मनिर्भर बने। राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्रों में सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, तथा सामाजिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री की घोषणाओं से कोल समाज के बीच सशक्तिकरण की नई आशा का संचार हुआ है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजा भभूतसिंह के योगदान का स्मरण भी किया। राजा भभूतसिंह के सम्मान में उनके शासन केंद्र पचमढ़ी में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कौल समाज में अनेक गौरवशाली व्यक्तित्व रहे हैं इनमें बुधु भगत और मदारा महतो भी शामिल हैं। कौल समाज इनके कृतित्व से गौरवान्वित है। वर्ष 1831 और 1832 में इन जनजातीय नायकों के नेतृत्व में अंग्रेजों के अत्याचारों के विरूद्ध संघर्ष किया था। कौल समाज के बंधुओं ने भगवान श्रीराम के लिए पर्णकुटी बनाई थी। यह देश भक्त समाज है। जनजातीय समाज का इतिहास ऐसे महापुरूषों से गौरवशाली है। रानी दुर्गावती के सम्मान में सिंग्रामपुर में भी कैबिनेट बैठक आयोजित की गई।

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