मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा रवीन्द्र भवन में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय “आदि शिल्पग्राम महोत्सव” के शुभारंभ अवसर पर दिए गए भाषण का सार इस प्रकार है:उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की जनजातीय कला और कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यह कला परंपरा केवल शिल्प या चित्रकारी नहीं, बल्कि मां सरस्वती का आशीर्वाद और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने जनजातीय कलाकारों की कल्पनाशक्ति, शिल्पकौशल और बारीक चित्रकारी की सराहना करते हुए कहा कि इन कलाकारों की मेहनत ने दुनियाभर में भारत और विशेष रूप से मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया है।मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जनजातीय कलाओं के संरक्षण और कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल सांस्कृतिक धरोहर को सहेजती हैं बल्कि कलाकारों के जीवन स्तर को भी बेहतर बनाती हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए उस संकल्प को दर्शाता है, जिसमें वे राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए विकास की ओर अग्रसर होने की नीति को दोहराते हैं। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार प्राचीन कला, संस्कृति और परंपराओं के साथ-साथ इनसे जुड़े कलाकारों को भी संरक्षण दे रही है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना और उसे पहचान दिलाना है।
- गोंड चित्रकला को GI टैग: गोंड चित्रकला को जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिलना, न केवल इस पारंपरिक चित्रकला की अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है, बल्कि इससे जुड़े कलाकारों को वैश्विक मंच भी प्रदान करता है।
- जनजातीय कला और शिल्प को मंच देना: सरकार विभिन्न आयोजनों के माध्यम से जनजातीय कला, शिल्प और कलाकारों को न केवल प्रदर्शन का अवसर दे रही है, बल्कि उनके लिए बाजार भी उपलब्ध करा रही है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
- केंद्र सरकार के सहयोग से विकास कार्यक्रम: राज्य सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं का कार्यान्वयन तेजी से किया जा रहा है।