फरवरी 2021 में सैन्य तख्तापलट के जरिए म्यांमार की सेना ने चुनी हुई सरकार से सत्ता छीन ली थी, इसके बाद से ही चीन ने जुंटा शासन का समर्थन किया है। चीन के इस कदम ने म्यांमार के लोगों में नाराजगी पैदा की है। म्यांमार में एक धारणा है कि चीन तख्तापलट के खिलाफ जारी सशस्त्र विद्रोह को कमजोर कर रहा है। अराकान आर्मी जैसे विद्रोही समूहों को लेकर चीन ने नीति स्पष्ट नहीं की है।जहां उन्होंने जुंटा नेता मिन आंग हलिंग से मुलाकात की थी। टोरंटो स्थित यॉर्क यूनिवर्सिटी में म्यांमार के विशेषज्ञ हेट मिन ल्विन ने कहा कि म्यांमार के राजनीतिक हितधारक शायद ही कभी एकजुट रहे हों, लेकिन वांग यी की यात्रा पर सैन्य शासन का विरोध करने वाले सभी समूहों ने सर्वसम्मति से चीन विरोधी भावना जाहिर की।

म्यांमार के अंदर नाराजगी के आने वाले समय में और बढ़ने की संभावना है, लेकिन एक्सपर्ट इसे खतरे के रूप में देखते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि चीन को अलग-थलग करना उल्टा पड़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि म्यांमार और चीन पड़ोसी हैं, इसलिए चीन को केवल शैतान नहीं बना सकते हैं। कूटनीतिक रास्ता हमेशा बने रहना चाहिए।