
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती-किसानी और हमारी संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। हमारा पारम्परिक जीवन, लोककलाएं, रीति-रिवाज और बहुरूपी मौखिक परंपराएं कृषि के मूल से ही उत्पन्न हुई हैं। यही कारण है कि कृषि लोकरंग का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी कृषि सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भोपाल सहित प्रदेश के सभी संभागों और अंचलों में कृषि लोकरंग-2026 पूरी गरिमा, भव्यता और जनभागीदारी के साथ मनाया जाए।मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में कृषि लोकरंग-2026 की तैयारियों के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कृषि लोकरंग का आयोजन आगामी 26 से 30 जनवरी 2026 तक किया जाएगा। इस दौरान खेती, किसान और कृषि आधारित परंपराओं को केंद्र में रखकर विविध सांस्कृतिक, शैक्षणिक और प्रतियोगी गतिविधियां आयोजित होंगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब कृषि आधारित रोजगारपरक उद्योगों के समावेशी विकास के लक्ष्य को लेकर कृषि कैबिनेट का आयोजन किया जाएगा। किसान कल्याण, स्वाभिमान एवं पर्व कृषि ग्राम सभा जैसे आयोजन किए जाएंगे। साथ ही कृषि से जुड़े उन्नत उपकरणों के क्रेता-विक्रेताओं के सम्मेलन, कृषि उत्सव और किसान मेले भी आयोजित होंगे। सरकार की प्रत्येक योजना का लाभ किसानों तक पहुंचाना प्राथमिकता है।डॉ. यादव ने कहा कि कृषि सभ्यता हमारी परम्पराओं से भीतर तक जुड़ी हुई है। इसलिए ग्रामीणों, युवाओं और विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से खेती-किसानी से जोड़ना आवश्यक है। सफल किसानों के एग्री-बिजनेस मॉडल प्रस्तुत किए जाएं, ताकि अन्य किसान उनसे प्रेरणा लेकर अपनी आय बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि कृषि लोकरंग वास्तव में ग्राम पंचायत और विकासखंड स्तर पर नागरिकों तथा युवाओं को खेती से जोड़ने और इसके व्यापक लोकव्यापीकरण का प्रयास है।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कृषि लोकरंग के दौरान बड़े कस्बों और शहरों में सांस्कृतिक एवं नाट्य प्रस्तुतियों, प्रतियोगिताओं और लोककलाओं के माध्यम से सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी जाए। सहज परम्पराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को भी कृषि से जुड़े विषयों से जोड़ा जाए। कार्यक्रम ऐसे हों, जिनमें जनता का स्वाभाविक और भावनात्मक जुड़ाव हो। लोकरंजन के कार्यक्रम नीचे से क्रियान्वित होकर ऊपर तक पहुंचें, जिससे कृषि के प्रति सकारात्मक वातावरण बने।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि लोकरंग को जन-जन का उत्सव बनाने के लिए देशी वेशभूषा जैसे पगड़ी, धोती, साफा आदि को प्रोत्साहित करने, पुराने देशज बीजों के संग्रहण से जुड़ी प्रतियोगिताएं, लखपति किसानों की प्रतियोगिता, अच्छी नर्सरी और बगीचे वालों की प्रतियोगिता तथा साइकिल प्रतियोगिता जैसे नवाचारों के आयोजन के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित किया है। इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक आकर्षक लोगो तैयार किया जाए। सोयाबीन, मूंग, उड़द, मक्का सहित अन्य फसलों का बेहतर उत्पादन करने वाले किसानों को आमंत्रित कर उनके अनुभव साझा कराए जाएं।बैठक में सचिव किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री निशांत वरवड़े ने बताया कि कृषि लोकरंग-2026 के दौरान पारम्परिक ग्रामीण खेल, खेत-खलिहान आधारित गतिविधियां, फसल, मौसम और ऋतुओं पर गीत-गायन, देशज कृषि ज्ञान पर आधारित प्रतियोगिताएं, नवप्रयोगधर्मी किसानों का चयन एवं मुख्यमंत्री से सीधा संवाद, ओपन माइक और ‘मेरा किसान, मेरा अभिमान’ सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस सत्र में किसान के बच्चे मंच से बताएंगे कि किसान देश की शान क्यों हैं।बैठक में संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, सचिव श्री आलोक कुमार सिंह, आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।