
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में किसानों की फसलों को वन्य जीवों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए शाजापुर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में एक अभिनव अभियान चलाया गया। इस अभियान में हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक का उपयोग कर वन्य जीवों को सुरक्षित रूप से पकड़कर स्थानांतरित किया गया। यह अपने आप में देश का पहला सफल प्रयास है जिसमें अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग कर वन्य जीव संरक्षण और किसानों की सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता दी गई।यह अभियान वन्य जीव संरक्षण और किसानों की सुरक्षा, दोनों के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। मध्यप्रदेश में हम ऐसा संतुलन स्थापित करना चाहते हैं जहाँ प्रकृति, वन्य जीव और किसान तीनों सामंजस्य के साथ आगे बढ़ें।”मुख्यमंत्री ने वन विभाग की पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दीपावली के समय भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी कर सेवा और समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया।
हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक का अभिनव उपयोग
अभियान में दक्षिण अफ्रीका की “कंजरवेशन सॉल्यूशंस” कंपनी के 15 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने प्रदेश की वन विभाग टीम को प्रशिक्षित किया और उनके सहयोग से लगातार 10 दिन तक अभियान चलाया गया।इस अभियान में रॉबिन्सन-44 हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया, जो ऐसे अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।हेलीकॉप्टर से पहले खेतों और खुले क्षेत्रों में वन्य जीवों की लोकेशन का सर्वे किया गया। इसके बाद रणनीतिक रूप से ‘बोमा’ (Boma) बनाया गया — यह एक फनल आकार की संरचना होती है, जिसे घास और हरे जाल से ढंका जाता है ताकि जानवर भयभीत न हों।हेलीकॉप्टर की सहायता से धीरे-धीरे हांका लगाकर वन्य जीवों को बोमा में प्रवेश कराया गया, जिसके बाद उन्हें वाहनों के माध्यम से सुरक्षित अभयारण्यों तक पहुंचाया गया।
913 वन्य जीवों का सफल पुनर्वास
लगभग 10 दिनों तक चले इस अभियान में कुल 913 वन्य जीवों को सुरक्षित रूप से पकड़ा गया और पुनर्वास कराया गया। इनमें —
- 846 कृष्णमृग (Blackbucks)
- 67 नीलगाय (Blue Bulls) शामिल हैं।
सभी नीलगायों को गांधीसागर अभयारण्य के लगभग 64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में छोड़ा गया, जबकि कृष्णमृगों को गांधीसागर, कूनो और नौंरादेही अभयारण्यों में पुनर्स्थापित किया गया।अभियान में वन्य जीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही और सभी जीव अब अपने नए आवासों में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। अभियान के अंतिम दिन भी 142 कृष्णमृग सफलतापूर्वक पकड़े गए।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में चला अभियान
पूरे अभियान की सतत निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई।
- प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक श्री शुभरंजन सेन,
- अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक (चीता प्रोजेक्ट) श्री उत्तम शर्मा,
- मुख्य वन संरक्षक उज्जैन श्री एम.आर. बघेल,
अभियान स्थल पर स्वयं उपस्थित रहे।
डॉ. कार्तिकेय (वाइल्ड लाइफ एवं फॉरेस्ट्री सर्विस) ने अभियान में तकनीकी नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने इससे पूर्व गौर (बाइसन) ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।शाजापुर विधायक श्री अरुण भीमावद ने भी अभियान स्थल पहुंचकर इस पहल की सराहना की।अभियान की सफलता पर एसीएस फॉरेस्ट श्री अशोक बर्णवाल, तथा वन बल प्रमुख श्री व्ही.एन. अंबाडे ने पूरी टीम को बधाई दी।