ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी तकनीक की अहम भूमिका – डीआरडीओ प्रमुख समीर कामत,

पुणे, – भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के चेयरमैन डॉ. समीर कामत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य क्षमता, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक दूरदर्शिता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में डीआरडीओ द्वारा विकसित स्वदेशी ब्रह्मोस और आकाशतीर रक्षा प्रणाली ने निर्णायक भूमिका निभाई। यह मिशन न केवल पाकिस्तान को सटीक और प्रभावी जवाब था, बल्कि पूरी दुनिया के सामने भारत की तकनीकी क्षमता का सशक्त संदेश भी था।शनिवार को पुणे में आयोजित डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के चौथे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. कामत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर मात्र एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की रक्षा नीति का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा, “यह मिशन दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा में पूरी तरह सक्षम है और इसके लिए हमें किसी बाहरी तकनीक पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।”डीआरडीओ प्रमुख ने आगे कहा कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल और आकाशतीर रक्षा प्रणाली का प्रदर्शन इस ऑपरेशन में भारत के सैन्य शस्त्रागार की मजबूती और स्वदेशी अनुसंधान की सफलता का प्रमाण है। यह तकनीक न केवल रक्षात्मक, बल्कि आक्रामक क्षमता में भी भारत को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई पर ले जाती है।

उन्होंने इस अवसर पर रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में नवाचार, युवा वैज्ञानिकों के योगदान और उच्च तकनीकी शिक्षा की अहमियत पर भी जोर दिया। डॉ. कामत ने कहा कि भविष्य की युद्धनीतियां तकनीक-आधारित होंगी और भारत को इस दिशा में अग्रणी बनाए रखने के लिए स्वदेशी अनुसंधान को और गति दी जाएगी।कार्यक्रम में डीआईएटी के कुलपति, संकाय सदस्य, छात्र-छात्राएं और रक्षा अनुसंधान क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। समारोह के अंत में डॉ. कामत ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे स्वदेशी तकनीक को मजबूत बनाने और भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाने में योगदान दें।

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