ऑपरेशन सिंदूर: आतंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, सेना पर गर्व – रक्षा मंत्री ने बढ़ाया जवानों का मनोबल,

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज जम्मू-कश्मीर के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने सेना के जवानों और अधिकारियों से मुलाकात कर उनकी हौसला अफजाई की। यह दौरा आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद हो रहा है, जिससे इस दौरे को विशेष महत्व मिल रहा है।रक्षा मंत्री के साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद रहे। श्रीनगर पहुंचते ही राजनाथ सिंह सीधे चिनार कॉर्प्स के मुख्यालय गए, जो कि घाटी में सेना की जिम्मेदारी संभालने वाली प्रमुख सैन्य इकाई है। वहां उन्होंने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और वर्तमान हालात पर जानकारी ली।सेना द्वारा हाल ही में चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियानों में मिली सफलता की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना के जवान कठिन परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा और बहादुरी से काम कर रहे हैं। उन्होंने जवानों से बातचीत के दौरान उनकी समस्याएं भी सुनीं और सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।राजनाथ सिंह ने कहा, “देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए हमारे जवान जो योगदान दे रहे हैं, वह प्रशंसनीय है। सरकार सेना के साथ खड़ी है और हर जरूरत को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।”

चिनार कॉर्प्स द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, हालिया ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई आतंकियों को मार गिराया गया और बड़ी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद किए गए। इससे घाटी में सुरक्षा स्थिति को और मजबूत करने में मदद मिली है।इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पंजाब के आदमपुर एयरबेस पर वायुसेना के जवानों से मिले थे। यह केंद्र सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें शीर्ष नेतृत्व सीधे तौर पर सशस्त्र बलों के साथ संवाद स्थापित कर रहा है।

रक्षा मंत्री का यह दौरा ना सिर्फ घाटी में शांति और स्थायित्व की दिशा में उठाया गया कदम है, बल्कि इससे जवानों को यह संदेश भी दिया गया है कि देश का नेतृत्व उनके साथ मजबूती से खड़ा है। साथ ही यह दौरा उन लोगों के लिए भी स्पष्ट संकेत है जो शांति भंग करने की कोशिश करते हैं कि भारत अपनी एकता, अखंडता और सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।राजनाथ सिंह के दौरे से उम्मीद जताई जा रही है कि इससे सेना और आम नागरिकों के बीच भरोसे की डोर और मजबूत होगी, जिससे घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद मिलेगी।

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