भोपाल। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एम्स भोपाल में कार्यरत एक महिला सहायक प्राध्यापक की मौत के मामले में गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले की जांच के निर्देश देते हुए संबंधित अधिकारियों से 15 दिन के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।प्राप्त शिकायत के अनुसार, 5 जनवरी 2026 को महिला डॉक्टर की मृत्यु लंबे समय से हो रहे मानसिक उत्पीड़न और प्रतिकूल कार्य वातावरण के कारण हुई बताई गई है। शिकायत में ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद यूनुस पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं।शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पीड़ित महिला डॉक्टर ने अपनी समस्याओं और कार्यस्थल पर हो रहे कथित उत्पीड़न के संबंध में संस्थान के अधिकारियों को तीन बार ई-मेल के माध्यम से अवगत कराया था। हालांकि, शिकायत के अनुसार इन ई-मेल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।इसके अलावा शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संस्थान में पूर्व में भी महिला डॉक्टरों द्वारा की गई शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और कई मामलों को दबा दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस मामले में अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर प्रश्न उठ रहे हैंराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स प्रशासन से संस्थान में गठित यौन उत्पीड़न निवारण समिति (Internal Complaints Committee) से संबंधित जानकारी भी मांगी है। आयोग ने पिछले तीन वर्षों में समिति के पास प्राप्त शिकायतों, उन पर की गई जांच तथा की गई कार्रवाई का पूरा विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मामले से जुड़ी संपूर्ण जानकारी और अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर आयोग को उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।