
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती शुरू कर दी है। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तेजी से मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इस शक्तिशाली नौसैनिक समूह में लगभग आधा दर्जन अत्याधुनिक युद्धपोत, पनडुब्बियां और सप्लाई शिप शामिल हैं, जो अमेरिकी सैन्य ताकत का बड़ा संकेत माने जा रहे हैं।अमेरिका ने आखिरी बार पिछले वर्ष जून में मध्य पूर्व में इतना बड़ा सैन्य जमावड़ा किया था। उस समय इजरायल और अमेरिका के बीच करीब 12 दिनों तक सशस्त्र सैन्य संघर्ष चला था। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले भी किए थे। ऐसे में मौजूदा सैन्य तैनाती को लेकर आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका एक बार फिर ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य कदम की तैयारी में है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन किया था। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ईरानी सरकार की सख्त कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा था कि “मदद रास्ते में है।” हालांकि ईरान ने एक सप्ताह के भीतर ही विरोध प्रदर्शनों को दबा दिया, जिसके बाद ट्रंप की बयानबाजी कुछ समय के लिए कम हो गई। इसके बावजूद, अमेरिकी सेना की ताजा तैनाती ने ईरान पर संभावित हमले की आशंका को फिर से हवा दे दी है।गुरुवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि एक अमेरिकी “आर्मडा” खाड़ी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है और उसका फोकस ईरान पर है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने भी पुष्टि की है कि एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अन्य सैन्य साजो-सामान के साथ आने वाले दिनों में मध्य पूर्व पहुंचने वाला है। ट्रंप ने कहा, “हम ईरान पर नजर बनाए हुए हैं। हो सकता है कि हमें इस सेना का इस्तेमाल न करना पड़े, लेकिन एहतियात के तौर पर एक बड़ा बेड़ा उस दिशा में जा रहा है।”
मध्य पूर्व में अमेरिका के दर्जनों सैन्य ठिकाने हैं, जहां लगभग 40,000 से 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, अमेरिका इस क्षेत्र में कम से कम 19 स्थानों पर स्थायी और अस्थायी सैन्य अड्डे संचालित करता है। इनमें से आठ स्थायी बेस बहरीन, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित हैं।मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की पहली तैनाती जुलाई 1958 में हुई थी, जब अमेरिकी सेना को लेबनान की राजधानी बेरूत भेजा गया था। उस समय लगभग 15,000 अमेरिकी मरीन और सैनिक वहां तैनात थे। बाद के वर्षों में अमेरिका ने लेबनान से अपनी सेना हटाकर अन्य देशों में स्थायी सैन्य अड्डे स्थापित किए, जो आज भी क्षेत्रीय सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।