
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल प्रदाय से उत्पन्न स्वास्थ्य संकट को गंभीरता से लेते हुए जबलपुर प्रवास से लौटने के बाद रात्रि में मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्थिति की समीक्षा की। बैठक में संभागायुक्त इंदौर, जिला प्रशासन, नगर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।बैठक में संभागायुक्त इंदौर द्वारा अवगत कराया गया कि 28 दिसम्बर को भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त के प्रकरण सामने आए थे, जिनका संभावित कारण पेयजल प्रदूषण पाया गया। सूचना मिलते ही नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई। प्रभावित क्षेत्र में कुल 13 हजार 444 घरों का सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान कुल 310 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 235 मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।प्रशासन द्वारा चौबीस घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी निर्धारित की गई तथा रेफरल व्यवस्था के लिए 10 एम्बुलेंस तैनात की गईं। अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार के लिए आवश्यक बेड्स चिन्हांकित किए गए। विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम को मौके पर भेजा गया। साथ ही शिकायतों के त्वरित निवारण हेतु 24×7 कॉल सेंटर सक्रिय किया गया तथा सहायता डेस्क भी स्थापित की गई। घर-घर से 1600 से अधिक जल नमूने जांच के लिए लिए गए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जन-स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इंदौर नगर निगम आयुक्त श्री दिलीप यादव को हटाकर मंत्रालय में पदस्थ करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही लापरवाही के लिए अपर आयुक्त श्री रोहित सिसोनिया तथा प्रभारी अधीक्षण यंत्री श्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित करने के आदेश दिए गए।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नगर निगमों के महापौरों के साथ-साथ संभागायुक्तों, कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों की बैठक लेकर नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इंदौर जैसी घटना की पुनरावृत्ति प्रदेश के किसी भी शहर में नहीं होनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों का अमला जनता की सेहत के प्रति पूरी तरह सजग और सतर्क रहे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। पेयजल अथवा अन्य आवश्यक सुविधाओं से संबंधित शिकायतें प्राप्त होते ही प्रशासनिक अधिकारी तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिनकी जानकारी बैठक में दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।घनी आबादी वाले क्षेत्रों एवं 20 वर्ष से अधिक पुरानी पाइप लाइनों का चिन्हांकन किया जाए। बार-बार लीकेज वाली एवं नालियों/सीवर के समीप से गुजरने वाली पाइप लाइनों की पहचान कर 48 घंटे के भीतर मरम्मत सुनिश्चित की जाए। जल शोधन संयंत्रों और टंकियों की नियमित सफाई एवं जल नमूना परीक्षण किया जाए। प्रदूषण पाए जाने पर तुरंत जल आपूर्ति रोकी जाए और वैकल्पिक सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जाए। क्लोरीनेशन सिस्टम की 24×7 निगरानी, पाइपलाइन लीकेज को लेकर जन-जागरूकता अभियान तथा शिकायतों का 24 से 48 घंटे में निराकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सी.एम. हेल्पलाइन पर प्राप्त दूषित जल संबंधी शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।