
इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए ऑपरेशन ‘राइजिंग’ ने वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक हलचल मचा दी है। इस ऑपरेशन में इजरायल ने एक साथ 200 लड़ाकू विमानों के जरिए ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। शुरुआती 24 घंटों में ही ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिसमें देश के मिलिट्री चीफ ऑफ स्टाफ, आईआरजीसी (IRGC) प्रमुख और एयरफोर्स चीफ की मौत की पुष्टि हुई है।इजरायली हमले के बाद अब ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है, और दोनों देशों के बीच हमलों का सिलसिला लगातार जारी है। इजरायली लड़ाकू विमान ईरान की हवाई सीमा में गश्त कर रहे हैं, जिससे तेहरान की वायु सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।इस संकट के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक अहम बयान दिया है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS द्वारा आयोजित बैठक में उन्होंने खुलासा किया कि रूस ने पहले ही ईरान को वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense Systems) विकसित करने के लिए साझेदारी की पेशकश की थी, लेकिन ईरान ने इसमें रुचि नहीं दिखाई थी।आप जानते हैं कि हमने एक बार अपने ईरानी मित्रों को वायु रक्षा प्रणाली पर काम करने की पेशकश की थी। उस समय हमारे भागीदारों ने बहुत अधिक रुचि नहीं दिखाई।”यह बयान ऐसे समय पर आया है जब विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि ईरान ने समय रहते रूस की पेशकश को स्वीकार किया होता, तो मौजूदा संकट में उसे इतनी भारी क्षति नहीं उठानी पड़ती।
प्रभाव:
यह घटनाक्रम सिर्फ ईरान और इजरायल के बीच युद्ध की दिशा नहीं तय कर रहा, बल्कि रूस की वैश्विक सामरिक भूमिका और रक्षा साझेदारियों पर भी प्रकाश डालता है। साथ ही यह घटना ईरान की रक्षा रणनीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।