
मध्यप्रदेश की आशा एवं आशा पर्यवेक्षकों ने अपने बकाया प्रोत्साहन राशि के भुगतान तथा अन्य महत्वपूर्ण मांगों को लेकर शासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया गया कि दशहरा पूर्व किए गए पत्र दिनांक 26 सितंबर 2025 के बावजूद आज दिनांक तक बकाया भुगतान नहीं किया गया है, जिससे प्रदेश की हजारों आशा कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं।ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि अधिकांश जिलों में आशा कार्यकर्ताओं के तीन-तीन माह तक की प्रोत्साहन राशि बकाया है। राखी और दशहरा जैसे प्रमुख त्योहारों पर भी भुगतान न होने से आशा बहनों में भारी असंतोष व्याप्त है। अब दीपावली नजदीक है, फिर भी भुगतान को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जो अत्यंत निराशाजनक है।आशा एवं पर्यवेक्षकों ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि उनके ऊपर नियमित कार्यों के अलावा लगातार ऑनलाइन कार्यों का बोझ बढ़ाया जा रहा है। एनसीडी, यू-विन पोर्टल, एचबीएनसी एंट्री जैसे तकनीकी कार्यों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले 5जी मोबाइल/टैबलेट एवं पर्याप्त इंटरनेट डाटा उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही इन अतिरिक्त कार्यों के लिए अलग से प्रोत्साहन राशि दिए जाने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिला सतना के मझगवां ब्लॉक में कार्यरत आशा कार्यकर्ता श्रीमती राजकुमारी मवासी का ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना में दुखद निधन हो गया था। शासन से अनुरोध किया गया है कि मृतका के परिवार को कम से कम ₹5 लाख का मुआवजा, निर्धारित बीमा राशि का भुगतान, और परिवार से एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति तत्काल प्रदान की जाए।
आशा एवं पर्यवेक्षकों ने अपने ज्ञापन में निम्न प्रमुख मांगें रखी हैं —
- सभी बकाया प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान किया जाए तथा भविष्य में समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- केंद्र सरकार द्वारा घोषित ₹1500 की बढ़ोत्तरी का एरियर सहित भुगतान किया जाए।
- अन्य राज्यों की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी त्योहार एलाउंस (Festival Allowance) का भुगतान दीपावली पर किया जाए।
- बढ़ते ऑनलाइन कार्य के लिए उचित प्रोत्साहन राशि एवं आवश्यक डिजिटल संसाधन (5G टैबलेट, डाटा) उपलब्ध कराए जाएं।
- मृत आशा कार्यकर्ता श्रीमती राजकुमारी मवासी के परिवार को ₹5 लाख मुआवजा, बीमा राशि एवं अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेशभर की आशा एवं पर्यवेक्षक बहनें जिला व ब्लॉक स्तर पर विरोध प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार (काम बंद हड़ताल) करने को बाध्य होंगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।