
राजधानी की सड़कों पर आज जनशक्ति का अभूतपूर्व नज़ारा देखने को मिला, जब हज़ारों की संख्या में आदिवासी समाज, छात्र-युवा और बेरोज़गारों ने एकजुट होकर “जन चेतावनी पदयात्रा” के माध्यम से अपने अधिकारों की मांगों को लेकर सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचाई।
यह पदयात्रा सिर्फ़ एक विरोध प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह जनता की चेतावनी थी — कि अब हक़ मांगा नहीं जाएगा, लिया जाएगा।कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी विकास परिषद – छात्र प्रभाग द्वारा किया गया। परिषद के प्रदेश अध्यक्ष नीरज बारिवा (मो. 8462019503) के नेतृत्व में युवाओं ने रोजगार, छात्रवृत्ति घोटालों, भूमि अधिकारों और सरकारी नीतियों की अनदेखी के खिलाफ एकजुट आवाज़ उठाई।
मुख्य बिंदु:
- 🔥 युवाओं और छात्रों की भागीदारी — राजधानी की सड़कों पर उभरी एकता ने सरकार को संदेश दिया कि अब घोषणाओं से नहीं, काम से भरोसा बनेगा।
- 💬 मुख्य मुद्दे — छात्रवृत्ति घोटाला, आदिवासी ज़मीनों पर अवैध कब्ज़े, बढ़ती बेरोज़गारी और शिक्षा में असमानता।
- 📢 साफ संदेश — युवाओं ने कहा, “अब चुप नहीं रहेंगे, जवाब सड़कों से मिलेगा।”
नीरज बारिवा ने कहा कि सरकार ने बार-बार वादे किए, लेकिन न तो रोजगार के अवसर बढ़े, न ही शिक्षा और छात्रवृत्ति योजनाओं में पारदर्शिता आई। अब यह आंदोलन “मांग” से “अधिकार” की दिशा में आगे बढ़ेगा।उन्होंने आगे बताया कि यह शुरुआत मात्र है — आने वाले समय में गांव-गांव और शहर-शहर तक यह चेतावनी अभियान पहुंचाया जाएगा। परिषद आने वाले हफ्तों में राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह के जनसंवाद और पदयात्रा कार्यक्रम आयोजित करेगी।जन चेतावनी पदयात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश का युवा और आदिवासी समाज अब अपने अधिकारों को लेकर सजग, संगठित और संकल्पित है। यह सिर्फ़ विरोध की लहर नहीं, बल्कि एक नए सामाजिक परिवर्तन का संकेत है।
आयोजक:
आदिवासी विकास परिषद – छात्र प्रभाग
संपर्क: नीरज बारिवा, प्रदेश अध्यक्ष – 📞 8462019503