
अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के लिए 5,800 करोड़ रुपये (686 मिलियन डॉलर) के अपग्रेड पैकेज को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद पाकिस्तानी वायुसेना के F-16 बेड़े की सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। साथ ही यह कदम अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को भी सुदृढ़ करेगा।ट्रंप प्रशासन द्वारा लिए गए इस निर्णय ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत-अमेरिका के बीच हालिया तनावपूर्ण संबंधों के संदर्भ में ‘दिल्ली को संदेश’ देने की कोशिश भी हो सकता है।भू-रणनीतिकार ब्रह्मा चेलानी ने इस फैसले को भारत के लिए स्पष्ट संदेश बताया। उन्होंने कहा:इसमें निश्चित तौर पर भारत के लिए एक मैसेज है। भले ही मोदी और ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई हो, फिर भी वॉशिंगटन और बीजिंग—अपनी वैश्विक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद—पाकिस्तान में अपने लाभ बढ़ाने में एक समान हित पा रहे हैं। खासकर भारत के क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने में दोनों की सोच मिलती दिखाई देती है। नई दिल्ली को अभी इस कठिन वास्तविकता का सामना करना है।”
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अमेरिका इस कदम के जरिए भारत पर रणनीतिक दबाव डालने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट कहती है कि इसका उत्तर “हां” है, और इसके कई कारण हैं:
- यह मंजूरी ऐसे समय दी गई है जब अमेरिका, भारत पर अमेरिकी हथियारों की खरीद बढ़ाने के लिए दबाव डाल रहा है।
- हाल ही में भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव देखा गया है।
- अगस्त में ट्रंप प्रशासन ने रूसी कच्चे तेल की खरीद के मामले में भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया था।
- इसके बाद भी भारत द्वारा रूस से आयात जारी रखने के संकेतों ने वॉशिंगटन-नई दिल्ली संबंधों में असहजता बढ़ाई है।