मध्यप्रदेश के महाविद्यालयीन छात्रावासों में अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। अब तक इन विद्यार्थियों को केवल 10 माह की शिष्यवृत्ति प्रदान की जाती थी, जबकि महाविद्यालयों में लागू पृथक-पाठ्यक्रम एवं सेमेस्टर प्रणाली के कारण विद्यार्थियों की उपस्थिति पूरे 12 माह की होती है। इस असमानता को दूर करने हेतु लंबे समय से मांग उठ रही थी।माननीय अध्यक्ष श्री अंतरसिंह आर्य जी (राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली), आयोग के वरिष्ठ सलाहकार श्री प्रकाश सिंह उइके जी, मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव जनजाति कार्य विभाग श्री गुलशन बामोरा जी तथा विशिष्ट सहयोगी समाजसेवी श्री पी. सूर्यनारायण सूरी जी के निरंतर प्रयासों एवं मार्गदर्शन से यह विषय मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रि-परिषद् (कैबिनेट) बैठक में प्रस्तुत किया गया।

कैबिनेट द्वारा पारित इस निर्णय के अंतर्गत अब विद्यार्थियों को 10 माह की बजाय पूरे 12 माह की शिष्यवृत्ति प्रदान की जाएगी। यह कदम अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक सहयोग भी प्रदान करेगा।यह निर्णय न केवल विद्यार्थियों की आर्थिक चुनौतियों को कम करेगा, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करेगा। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं समर्पण की भावना को भी बल मिलेगा।अनुसूचित जनजाति वर्ग के समस्त विद्यार्थी इस दूरदर्शी एवं कल्याणकारी पहल के लिए माननीय अध्यक्ष जी तथा सहयोगीगणों के प्रति हृदय से आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह निर्णय निस्संदेह आने वाली पीढ़ियों के शैक्षणिक भविष्य को सुदृढ़ बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।